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नोटबंदी के खिलाफ धरना

किशनगंज : केन्द्र सरकार के नोटबंदी के खिलाफ बंगाल की तृणमूल कांग्रेस के नेतृत्व में किशनगंज समाहरणालय के समक्ष सर्वदलीय दल एक दिवसीय धरना दिया गया है. जिसमें कांग्रेस, राजद अन्य दल के नेतागण भी शामिल हुए. वहीं इसी धरने में तृणमूल कांग्रेस के परिवहन मंत्री, ग्रामीण मंत्री और कई विधायकों के साथ सैकड़ों की संख्या में बंगाल के कार्यकर्ताओं ने भाग लिया.

वहीं धरने को संबोधित करते हुए परिवहन मंत्री सांमतो अधिकारी ने कहा कि किशनगंज की घरती से ही मोदी के खिलाफ आंदोलन की शुरुआत होगी. नोटबंदी पर हमारे मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा पूछे गए सवाल का जवाब क्यो नहीं दे रहे है मोदी. नोटबंदी के बहाने से जनता को सताने वाले ऐसे नेता को हटाना होगा. वहीं धरने को संबोधित करते हुए किशनगंज के सांसद असरारूल हक ने नोटबंदी को एक मजाक बताया. उन्होंने कहा कि नोटबंदी कालेधन की समाप्ति के बात पर की गई थी.

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परन्तु सरकार क्यो नहीं बताती है कि नोटबंदी के कारण कितना कालाधन आया है? न कालाधन आया, ना ही आंतकवाद रूका, पर गरीब और मजदूर और किसानो का विकास जरूर रूक गया. इस मौके पर कांग्रेस, राजद और अन्य राजनीतिक दलो के नेताओं ने धरने को संबोधित किया. वहीं धरने में सैकड़ों की संख्या में विभिन्न दलो के कार्यकर्ता उपस्थित थे.

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नोटबंदी के बाद सीमा पर पसरा सन्नाटा

एक ओर जहां नोटबंदी रोज कोई न कोई राजनीतिक पार्टी धरना-प्रदर्शन में लगी है. तो कई राजनीतिक पार्टियां नोटबंदी से होने वाले नुकसान को लेकर सरकार से प्रश्न पूछ रही है. नोटबंदी जनता के लिए अच्छा है या खराब यह तो जनता समय के साथ फैसला करेगी. लेकिन दूसरी ओर नोटबंदी के कारण सीमा पर सन्नाटा छाया है. 1751 किलोमोमीटर जो कभी भारत-नेपाल के तस्करों के लिए स्वर्ग माना जाता था. आज वहां सन्नाटा समाया हुआ है. हालांकि भारत-नेपाल की खुली सीमा की सुरक्षा के लिए एसएसबी  तैनात है. पर भारत-नेपाल की खुली सीमा की भौगोलिक स्थिति का फायदा उठाने की फिराक में हमेशा तस्कर लगे रहते थे.

नोटबंदी के बाद तस्करी में आयी कमी

सीमा पर तैनात एसएसबी और कस्टम के अधिकारियों ने नाम न बताने की शर्त पर बताया कि नोटबंदी के सीमा पार से होने वाली तस्करी लगभग बंद सी हो गई है. तस्करी में लगभग 80 से 90 प्रतिशत की कमी आई है. सीमा पर तैनात कस्टम विभाग में होने वाले जब्ती के आंकड़ों में भी नोटबंदी के बाद काफी कमी देखी जा रही है. वहीं भारत-नेपाल की खुली सीमा जो कभी तस्करी के लिए बदनाम थी. आज वहां पर शांति छाया हुआ है.

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मौके की तलाश में है तस्कर

सीमा पर तस्करी के दम नाम कमाने वाले तस्करो ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि नोटबंदी के बाद नेपाल भारतीय नाटो की कीमत पहले की तरह नहीं रही है. क्योंकि नेपाल में खुला भारतीय नोट बड़ी मात्रा में उपलब्ध नहीं होने के कारण बड़े नोटों की मांग घट गई है जिससे बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है तथा भारत में नेपाली नोटों को भारतीय नाटो से बदलने पर दस प्रतिशत बट्टा अधिक लिया जा रहा है.

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सीमा पार नेपाल में भी देखा जा रहा है नोटबंदी का असर

इस कारण से हमारा धंधा चौपट हो रहा है. और हमलोग समय का इंतजार कर रहे है. जैसे नोटों की किल्लत की समस्या सुलझेगी बैसे ही हमलोगों का धंधा फिर परवान चढ़ जाएगा. तबतक हमलोगों ने सीमा से ध्यान हटा लिया है. यहीं कारण है कि नोटबंदी के बाद सीमा पर सन्नाटा पसरा हुआ है.

 

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